Why To Die From Bradykinin & Cytokine Storm

Dr.Ssarc

कोविड-19 पैन्डैमिक-एपीडैमिक ने वैश्विक स्तर पर हर किसी को मुसीबत मे डाल दिया है.भारत दूसरी लहर के बाद धीमे-2 लाकबंदी से बाहर आने की कोशिश मे है .जबकि कही राज्य सरकारे तो कही मीडिया तीसरी लहर को लेकर आशंकित ही नही जागरूक भी है.बहुत सी दवाये एलोपैथी मे बरती गयी फिर बदली गयी अनेको थैरेपी भी अपनायी गयी और स्वयं ही बंद भी कर दी गयी.वैक्सिनेशन को लेकर भी जनता मे संदेह बढा देशी विदेशी वैक्सिन निशुल्क ही नही वरन निजी हस्पतालो को एकमुश्त दाम भी सरकार ने तय कर दिये है .अभी मोनोक्लोनलएन्टीबाडी थैरेपी पर एक डोज का वहन ही 110000रू बडे हस्पतालो ने शुरू कर दिया जो माईल्ड माडिरेट केसो मे ही कारगर है.जबकि आयूष डा. ही काफी अच्छे से यह ईलाज कर रहा है.
कोरोना के ईलाज मे गंभीर रोगियो को बचाने मे होम्योपैथिक नोसोड वैक्सिन भी सालभर से तैयार की गयी है जिसे अभी भारत सरकार ने मंजुरी नही दी .जबकि 90% एल्काहल मे मृत वायरस का जेनेटिक मैटिरियल ही शरीर मे एन्टीबाडीज पैदा कर पैसिव इम्यूनाईजेशन से इम्यूनिटी बढाता है.शायद लोगो को निशुल्क मिलेगी इसलिये यूरोप से मंजूरी मिले.होम्योपैथी और वैक्सिनेशन थ्यौरी एक साथ ही 1796-97 के आसपास आयी थी .होम्योपैथी का तो बेस ही यही रहा है.मिनीमम डाज मैक्सिमम रिलिफ मृत जीवाणु,विषाणु न कि हाफडैड .
आज हम सवा सौ साल पहले आयी दवाओ का काम जानेगे जो नये सिरे से अनुसंधानित हुयी है.लोगो की जान बचाने मे यह निश्चितत: कारगर होगी.रोकथाम भी बेहतरीन तौर पर कर रही है .
उससे पहले जानते है यह सब………

संचारी (Communicable) और गैर-संचारी (Non-Communicable) रोग ,इनमें क्या अंतर है.

कोरोनावायरस महामारी एक संक्रमित व्यक्ति की खांसी या साँस के माध्यम से (इनसे निकली बून्दो से )एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. ये बूंदें व्यक्ति के आसपास की वस्तुओं और सतहों पर रह जाती हैं. जब अन्य लोग इन वस्तुओं या सतहों को छूते हैं, तो वायरस उस व्यक्ति के शरीर में हाथों , नाक व मुख के माध्यम से प्रवेश कर सकता है. इस कारण बीमार या संक्रमित व्यक्ति से 6 फीट से अधिक दूर पर रहना महत्वपूर्ण है. एक तथ्यानुसार यह 22-25 फीट तक मार कर सकता है.

(Communicable) रोग क्या हैं?

संक्रामक रोग बैक्टीरिया, वायरस, कवक या परजीवी जैसे संक्रामक एजेंटों द्वारा फैलते हैं.यह संक्रामक रोगों के लिए  ‘contagious’ या  ‘infectious’ शब्द से जाना जाता है.यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पारित हो सकते  हैं. यानी संचारी रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क या परोक्ष रूप से भोजन, पानी, हवा इत्यादि तरीकों से स्थानांतरित होते हैं. संचारी रोगों को संक्रामक रोगों के रूप में भी जाना जाता है. उदाहरण के लिए, मलेरिया, एड्स, इत्यादि. 
 

संचारी रोगों के फैलने के विभिन्न कारण हो सकते हैं. यह दूषित सतह, भोजन या पेय, रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थ के सीधे संपर्क में आने से हवा के माध्यम से फैल सकता है. यह भी देखा गया है कि कभी-कभी संक्रमित जानवर या कीट के काटने से बीमारी फैल सकती है और कुछ बीमारियां एक से अधिक तरीकों से भी फैलती हैं.

जहां संचारी रोगों के मामलें सामने आते हैं वहां योजना बनाई जाती है, रोग की रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रमों का मूल्यांकन, उपयुक्त चिकित्सा और प्रकोप के सामान्य स्रोत का पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है. इसलिए, हम कह सकते हैं कि COVID-19 एक संचारी रोग है.

रोगाणु (Germs) के फैलने से बचने के लिए कुछ स्वस्थ आदतों के बारे में बताया जाता है या इन्हें फॉलो करना चाहिए जैसे:

  • खाना सुरक्षित रूप से तैयार करें और सुरक्षित रूप से हैंडल करें .
  • बार-बार हाथ धोना अनिवार्य है.
  • स्पर्श की गई सतहों को साफ और कीटाणुरहित करें ताकि कीटाणु मारे जाएं.
  • खांसी करते वक्त रूमाल या कोई कपड़े का उपयोग करें और टिश्यू या कपड़ा मुह पर रख कर छीकें.
  • व्यक्तिगत समान को साझा न करें.
  • टीका लगवाएं.
  • जंगली जानवरों को छूने से बचें.
  • अगर आप बीमार हैं, तो घर पर रहें. रोगाणु फैलाने से बचें.

गैर-संचारी रोग

गैर-संचारी (Non-Communicable) रोग को एक पुरानी बीमारी भी कहा जाता है जो लंबे समय तक रहती है और आनुवंशिक, शारीरिक, पर्यावरण और व्यवहार सहित कई कारकों के संयोजन का परिणाम है. यानी  गैर-संचारी रोगों को क्रोनिक (Chronic)भी कहा जाता है. 

ऐसा कहा जा सकता है कि गैर-संचारी रोग शरीर में किसी भी एलर्जी, स्व-प्रतिरक्षी प्रक्रिया, विरासत में मिले या गुणसूत्र दोष, सूजन या शरीर में किसी अन्य रोग के कारण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित नहीं होते हैं. इसलिए संचारी रोग एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत में नहीं मिलते जबकि गैर-संचारी रोग विरासत में मिल सकते हैं. अर्थात  गैर-संचारी एक गैर-संक्रामक बीमारी है. वे एलर्जी, पोषक तत्वों की कमी इत्यादि के कारण भी हो सकती है.

Who are at risk for such diseases?

सभी आयु वर्ग के लोग गैर-संचारी रोगों से प्रभावित हो सकते है.WHO के आंकड़ों के अनुसार, गैर-संचारी रोगों के लिए जिम्मेदार 15 मिलियन मौतें 30-70 वर्ष की आयु के बीच हुई हैं. 85% से अधिक मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में होने का अनुमान है. अस्वास्थ्यकर भोजन (unhealthy diets), शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने या किसी के भी शराब के सेवन से बच्चे, वयस्क और बुजुर्ग प्रभावित हो सकते हैं.

गैर-संचारी रोगों को नियंत्रित करने से जुड़े जोखिम कारकों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना है. स्वास्थ्य, वित्त, परिवहन, शिक्षा, कृषि, नियोजन, और अन्य सहित सभी क्षेत्रों के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है. गैर-संचारी रोगों से जुड़े जोखिमों को सहयोग करने और उन्हें रोकने और नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेपों को बढ़ावा देना भी अनिवार्य है. 

गैर-संचारी रोग प्रबंधन के लिए यह आवश्यक है कि 2025 तक गैर-संचारी रोगों से समयपूर्व मृत्यु के जोखिम में 25% कमी के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त किया जाए और गैर-संचारी रोग से अकाल मृत्यु में एक तिहाई की कमी का लक्ष्य 2030 तक पूरा किया जाए. गैर-संचारी रोग दीर्घकालिक , हृदय रोग, श्वसन से सम्बंधित रोग इत्यादि हैं.

रोकथाम इलाज से बेहतर है .prevention is better then cure

Thymus एक नरम अंग है जो Sternum के पीछे और फेफड़ों के बीच स्थित होता है। मानव शरीर में अंगों में, थाइमस एक दो-पैर वाली संरचना है जो लगभग हृदय और श्वासनली के साथ ऊपर की ओर होती है। थाइमस ग्रंथि आकार में कम या ज्यादा त्रिकोणीय होती है और इसमें दो पालियां होती हैं जो एक रेशेदार बाहरी हिस्से में होती हैं।

इसके थाइमिक लोब एक अपारदर्शी गुलाबी रंग के होते हैं, और सबसे सतही परत को कोर्टेक्स नाम दिया गया है। जब थाइमस हिस्टोलॉजी लिए कटा हुआ होता है, तो यह मज्जा नामक एक गहरी परत को प्रकट करेगा। यदि मानव छाती को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया , तो थाइमस ऊपरी चतुर्भुज के केंद्र में स्थित होगा, जिसके दोनों बगल में दोनों गुच्छे होंगे।

थाइमस ग्रंथि उपकला ऊतक और लसीका ऊतक के एक हिस्से से बना है। इसी तरह, ऊतकों में डेंड्रिटिक या “एंटीजन प्रेजेंटिंग” कोशिकाएं होंगी जो कि killer हत्यारी टी कोशिकाओं को संकेत देंगी। मैक्रोफेज किसी भी सेलुलर मलबे को हटाने या सीधे विदेशी रोगजनकों virus,bacteria को खाने के लिए मौजूद होंगे। मैक्रोफेज और डेंड्राइटिक कोशिकाएं वास्तव में थाइमस को पॉप्युलेट करती हैं, जो महत्वपूर्ण है क्योंकि वे थाइमस ग्रंथि की मदद करती हैं ताकि हानिकारक कचरे को छोड़ने और नष्ट करने के लिए रोगग्रस्त कोशिकाओं की पहचान करने के अपने प्रतिरक्षा कार्यों को पूरा कर सकें।

थाइमस ग्रंथि बचपन में सक्रिय होती है और यौवन के दौरान अपने अधिकतम वजन के लगभग एक औंस तक पहुँच जाती है। हालांकि, इस शिखर तक पहुंचने के बाद, थाइमस कम सक्रिय हो जाएगा। गतिविधि में यह गिरावट आकार में कमी के अनुरूप होगी जब तक कि थाइमस ऊतक वसा से लगभग पूरी तरह से बदल नहीं जाता है। यह सिकुड़न यौवन के बाद और वयस्कता में होगी।

थाइमस ग्रंथि एक स्रावी ग्रंथि है जिसकी प्रतिरक्षा कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके मुख्य स्रावों में से एक हार्मोन थायोसिन है। थाइमोसिन टी कोशिकाओं की परिपक्वता को उत्तेजित करता है, जो कि सफेद रक्त कोशिकाओं के व्युत्पन्न हैं जो हमारे सिस्टम को प्रसारित करते हैं।

टी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और रोगजनकों के शरीर को साफ करने में मदद करती हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाएं कैंसर की कोशिकाएं हो सकती हैं जो वायरस से संक्रमित प्रोलिफायरिंग या यहां तक ​​कि कोशिकाओं को रोकने की क्षमता खो देती हैं। टी सेल लक्ष्य सेल की सतह पर टी रिसेप्टर को बांधने में सक्षम होंगे जो इसकी अंतिम मौत शुरू करेगा। टी सेल की साइटोटॉक्सिसिटी इसके द्वारा उत्पन्न साइटोकिन्स से आती है।

प्रतिरक्षा स्वास्थ्य में थाइमस की आवश्यक भूमिका के बावजूद, थाइमस ग्रंथि हमारे पूरे जीवनकाल के दौरान सक्रिय नहीं है। वास्तव में, यह केवल यौवन तक सक्रिय है और वयस्कता में गैर-कार्यात्मक हो जाता है। लेकिन इसकी क्रियाएं शरीर को एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं और विदेशी एजेंटों के बीच अंतर नहीं कर सकती है।

बुखार, थकान और अस्वस्थता की पुरानी अवधि ऑटोइम्यून बीमारियों वाले रोगियों के जीवन को चिह्नित करती है। इसलिए, थाइमस ग्रंथि को लसीका प्रणाली से निकटता से जोड़ा जाता है क्योंकि यह शरीर का प्राकृतिक रक्षा नेटवर्क है। वाहिकाओं और ऊतकों का नेटवर्क जो लसीका प्रणाली को बनाता है, शरीर को शरीर से विषाक्त पदार्थों और अपशिष्टों को बाहर निकालने लिए संभव बनाता है।

थाइमस ग्रंथि का मुख्य कार्य थायोसिन हार्मोन जारी करना है जो टी कोशिकाओं की परिपक्वता को उत्तेजित करेगा। हमारे बचपन के सभी, श्वेत रक्त कोशिकाएं या लिम्फोसाइट्स थाइमस ग्रंथि के संपर्क में आएंगे। यह संपर्क उन्हें टी कोशिकाओं में बदल देगा। एक बार जब टी कोशिकाएं परिपक्व हो जाती हैं, तो वे लिम्फ नोड्स में चले जाएंगे जो शरीर में प्रतिरक्षा कोशिकाओं के भंडार हैं।

थाइमस ग्रंथि को अपरिपक्व टी कोशिकाओं का एक प्राप्तकर्ता माना जा सकता है जो अस्थि मज्जा में बनाए गए थे लेकिन अभी तक पूर्ण परिपक्वता तक नहीं पहुंचे हैं। थाइमस कोशिकाओं को प्राप्त करने के बाद, उन्हें केवल विदेशी एजेंटों पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह जिस तरह से होता है वह सकारात्मक चयन के माध्यम से होता है। केवल टी कोशिकाओं ने विदेशी एंटीजन को ठीक से प्रतिक्रिया दी है, उन्हें जीवित रहने के लिए चुना जाएगा और अंततः मज्जा में चले जाएंगे। टी कोशिकाएं जो कट नहीं बनाती हैं, वे स्वस्थ रोगी में एपोप्टोसिस से मर जाएंगे।

एक बार जब जीवित टी कोशिकाएं मज्जा में पहुंच जाती हैं, तो टी कोशिकाएं परिपक्व हो जाएंगी। शेष टी कोशिकाएं रोगजनकों को मारने के लिए आगे बढ़ेंगी, सहायक बी कोशिकाओं को सक्रिय करेंगी जो विशिष्ट एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती हैं, और पिछले संक्रमणों और वायरस की यादों को संग्रहित करेंगी ताकि अगर वे कभी वापस लौटते हैं तो शरीर उनसे लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सके।

Cytokine Storm

कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में शोध चल रहे कई कोरोनो वायरस के रोगी पहले खुद को बेहतर महसूस करते हैं लेकिन बाद में उनका इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर होने लगता है और वो कमजोर होते चले जाते हैं। इसके बाद उनका शरीर वायरस के मुताबिक ही रिएक्‍ट भी करता है। इसको साइटोकिन स्‍टार्म (Cytokine Storm) कहा जाता है। ऐसा क्‍यों और कैसे होता है। बीते कुछ महीनों के दौरान इसमें लगातार तेजी देखने को मिली है।

कुछ लोगों में ये भी देखने को मिला है कि जहां इस प्रभाव को कम करने में सफलता हासिल हुई वहां पर मरीज के बचने के चांस भी बढ़ जाते हैं। कहने का अर्थ है कि साइटोकिन स्‍टार्म का रोका जाना कोरोना मरीज के लिए बेहद प्रभावशाली है। कोरोना वायरस को खत्‍म करने के लिए करीब एक दर्जन दवाओं का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। कुछ ऐसी दवाएंं जिनका काम खून की सफाई करना है, जो डाइलीसिस के दौरान मशीनों से होता है, का भी टेस्‍ट किया गया है। कुछ दवाओं का क्‍लीनिकल ट्रायल भी चल रहा है। इनमें एंटीवायरल रेमडेसिविर भी शामिल है। not final
आपको बता दें कि एक तय मात्रा खून में मौजूद साइटोकिन (Cytokine) हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम के लिए काफी कारगर होते हैं। लेकिन यदि खून में इनकी मात्रा अधिक हो जाए तो ये घातक साबित हो सकते हैं। इनकी तय मौजूदगी हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को बेहतर काम करने में सहायक होती है। इनके बढ़ने से शरीर में इंफेक्‍शन हो सकता है और दूसरी बीमारियां शरीर को घेर सकती हैं। इम्‍यूनोथेरेपी के बाद भी इनकी संख्‍या बढ़ सकती है। इसके लक्षणों की बात करें तो इसमें तेज बुखार शरीर पर सूजन आना, जुकाम होना होता है। कई बार इसकी वजह से शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं जिससे जान तक जाने का खतरा पैदा हो जाता है।

हाल ही में एक जरनल ” सांइस इम्‍यून ” में एक दवा के कुछ शुरुआत आंकड़ों के आधार पर कहा गया है कि जब इम्‍यून सेल्‍स और पेथोजन के आपस में मिलने से मोलिक्‍यूल का निर्माण होता है जिसको साइटोकिंस कहते हैं। ये लड़ाई के लिए और cells का निर्माण करते हैं। न्‍यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लेंगोन हैल्‍थ के डॉक्‍टर जोस सेकर (rheumatologist) का कहना है कि cytokine खतरा कम होने पर हमारे शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम खुद ही प्रतिक्रियाओं को रोक देता है।

लेकिन कभी कभी ऐसा नहीं होता है और ये लगातार प्रतिक्रिया करता रहता है। इस लगातार होने वाली प्रतिक्रिया की वजह से लंग्‍स काम करना बंद कर देते हैं। इसके अलावा किडनी, लीवर को भी नुकसान पहुंचता है। इस तरह की चीजें युवाओं में और बच्‍चों में देखने को मिलती है। जहां पर वायरस की अवस्‍था माइल्‍ड है वहां पर ये समान स्थिति में ये ऑटोइम्‍यून डिजीज जैसे ल्‍यूपस, रूमाटॉएड अर्थराइटस की तर आगे बढ़ जाता है।

कुछ दवाओं को उचित उपयोग और इनके नुकसान की जानकारी होने के बाद इन्‍हें वायरस के खात्‍मे के लिए इस्‍तेमाल किया जा रहा है। इस महामारी की शुरुआत में चीन और इटली के डाक्‍टरों ने मरीज पर साइटोकिन (शॉक, फीवर, दिल के अधिक पंप होने और ब्‍लड प्रेशर के बढ़ने की समस्‍या को देखा और इसका इलाज किया था। इसके लिए tocilizumab दवा का इस्‍तेमाल किया गया। इस दवा को Roche द्वारा बाजार में Actemra के नाम से बेचा जाता है। ये Cytokine को रोक देती है जिसको इंटरल्‍यूकिन-6 या IL-6 कहा जाता है।

कुछ शोध के दौरान ये बात सामने आई है किआईएल-6 का हाईलेवल रेसिपिरेटरी फेल्‍योर या मौत की वजह बनता है। वहीं Actemra इस खतरे को कम करती है। साइंस इम्‍यून में छपे रिसर्च पेपर के मुताबिक केंसर के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली दवा Calquence Cytokine के स्रोतों को रोक या काट देती है।

BUT nothing is final.

देश में कोरोना संक्रमण से लोगों में साइटोकाइन स्टॉर्म का खतरा कैसे हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को ही शरीर का दुश्मन बना देता है. 

‘जब भी हमारे शरीर में कोई वायरस प्रवेश करता है तो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता उससे लड़ती है और उसे खत्म कर देती है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमारा इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है और बीमारी से लड़ने के साथ-साथ हमारे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाने लगता है।’ इसे ही ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ कहा जाता है। 
‘दरअसल, वायरस जब शरीर में प्रवेश करके तेजी से अपनी कॉपी बनाने लगता है, तो इम्यून सिस्टम भी वायरस को खत्म करने के लिए अधिक संख्या में साइटोकाइन पैदा करने लगता है। इस दौरान मरीज को तेज बुखार और सिरदर्द होता है।’ इस बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि जब इम्यून सिस्टम अनियंत्रित और साइटोकाइन का अधिक उत्पादन करने लगता है, तब साइटोकाइन स्टॉर्म का खतरा बढ़ जाता है। 
साइटोकाइन स्टॉर्म के दौरान मरीज कोमा में जा सकते हैं। व शरीर में साइटोकाइन के बढ़ने से ब्लड क्लॉट पैदा हो सकती है, दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती हैं और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ सकती है। 

महामारियों वाले फ्लू में शायद वायरस की वजह से नहीं बल्कि मरीज के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक सक्रिय हो जाने की वजह से मौत होती है। 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू, 2003 में सार्स महामारी और एच1एन1 स्वाइन फ्लू में भी ऐसा देखने को मिला है। 

साइटोकाइन
(इंटरल्यूकिन)

प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं द्वारा गुप्त विभिन्न प्रोटीन अणुओं में से कोई भी

साइटोकिन्स छोटे प्रोटीन (~ 5-20 केडीए) की एक विस्तृत और ढीली श्रेणी है जो सेल सिग्नलिंग में महत्वपूर्ण हैं। उनकी रिहाई के आसपास के कोशिकाओं के व्यवहार पर असर पड़ता है। यह कहा जा सकता है कि साइटोकिन्स ऑटोक्राइन सिग्नलिंग, पैराक्रिन सिग्नलिंग और इमोक्रोमाइनिंग एजेंटों के रूप में एंडोक्राइन सिग्नलिंग में शामिल हैं। हार्मोन से उनका निश्चित भेद अभी भी चल रहे शोध का हिस्सा है। साइटोकिन्स में केमोकाइन, इंटरफेरॉन, इंटरलेकिन्स, लिम्फोकाइन, और ट्यूमर नेक्रोसिस कारक शामिल हो सकते हैं लेकिन आम तौर पर हार्मोन या वृद्धि कारक नहीं होते हैं साइटोकिन्स कोशिकाओं की एक विस्तृत श्रृंखला द्वारा उत्पादित होते हैं, जिनमें मैक्रोफेज, बी लिम्फोसाइट्स, टी लिम्फोसाइट्स और मास्ट कोशिकाएं, साथ ही एन्डोथेलियल कोशिकाएं, फाइब्रोब्लास्ट्स और विभिन्न स्ट्रॉमल कोशिकाओं जैसे प्रतिरक्षा कोशिकाएं शामिल हैं; एक दिया गया साइटोकिन एक से अधिक प्रकार के सेल द्वारा उत्पादित किया जा सकता है।
वे रिसेप्टर्स के माध्यम से कार्य करते हैं, और प्रतिरक्षा प्रणाली में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं; साइटोकिन्स विनम्र और सेल-आधारित प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के बीच संतुलन को संशोधित करते हैं, और वे विशेष सेल आबादी की परिपक्वता, विकास और प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। कुछ साइटोकिन्स जटिल तरीकों से अन्य साइटोकिन्स की क्रिया को बढ़ाते या रोकते हैं।
वे हार्मोन से अलग होते हैं, जो महत्वपूर्ण सेल सिग्नलिंग अणु भी होते हैं, उस हार्मोन में उच्च सांद्रता में फैलता है और विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं द्वारा किया जाता है।
वे स्वास्थ्य और बीमारी में विशेष रूप से संक्रमण, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, सूजन, आघात, सेप्सिस, कैंसर, और प्रजनन के मेजबान प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण हैं।

“Κίνησις” Kinesis “आंदोलन” cyto, ग्रीक से “κύτος” kytos “गुहा, सेल” + ग्रीक से kines,: शब्द ग्रीक से आता है।

प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच सिग्नल ट्रांसडक्शन के लिए जिम्मेदार प्रोटीन के लिए एक सामान्य शब्द। इंटरफेरॉन और ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ) के अलावा, लिम्फोसाइट ने लिम्फोकाइन्स पैदा किए हैं, और मैक्रोफेज मोनोकिन्स का उत्पादन करते हैं, जिन्हें मिश्रित कहा जाता है। 1 9 7 9 से, यह भौतिक रूप से पहचाने गए लोगों से इंटरलेकिन (आईएल के रूप में संक्षेप में) को एकीकृत और क्रमबद्ध करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित किया गया है। वर्तमान में IL1 से IL18 ज्ञात हैं। साइटोकिन्स में प्रभावों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है, जिसमें प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच सूचना संचरण, प्रतिरक्षा कोशिकाओं के प्रसार और भेदभाव, तंत्रिका कोशिकाओं पर क्रिया, एंडोक्राइन कोशिकाएं, हेमेटोपोएटिक कोशिकाएं और इसी तरह की जानकारी शामिल है।
[5/18, 18:03] DR.SSARC: 

   INTERLUKIN VI       

इंटरल्यूकेन – 6; इल-6

IL-6 एक प्रोटीन साइटोकिन है जो एक मेसेंजर के रूप में कार्य करता है जो बाहरी आक्रमण पर इम्यून प्रणाली को सक्रिय करता है और शरीर में कैंसर फैलने को रोकने में मदद कर

Bradykinin

ब्रैडीकिनिन एक पेप्टाइड है जो सूजन को बढ़ावा देता है। यह प्रोस्टाइक्लिन, नाइट्रिक ऑक्साइड और एंडोथेलियम-व्युत्पन्न हाइपरप्लाराइजिंग कारक की रिहाई के माध्यम से धमनी को पतला करता है और प्रोस्टाग्लैंडीन F2 के माध्यम से नसों को संकुचित करता है, जिससे केशिकाओं में बढ़ते दबाव के कारण केशिका बेड में रिसाव होता

ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म

IN COVID-19, साइटोकिन स्टॉर्म 

हाल ही में अमेरिका स्थित ‘ओक रिज़ नेशनल लेबोरेटरी’ (Oak Ridge National Laboratory- ORLN) के वैज्ञानिकों के समूह ने COVID-19 संक्रमण के कुछ मामलों में मरीज़ों के स्वास्थ्य में तीव्र गिरावट के लिये ‘ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म’ (Bradykinin Storm) को उत्तरदायी बताया है।

‘ओक रिज़ नेशनल लेबोरेटरी’ के कुछ वैज्ञानिकों ने एक सुपर कंप्यूटर के माध्यम से COVID-19 मरीज़ों के फेफड़ों से लिये गए नमूनों के डेटा अध्ययन के आधार पर मरीज़ों के स्वास्थ्य पर ‘ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म’ के प्रभावों की जानकारी दी है।द साइंटिस्ट पत्रिका के अनुसार, ‘रेडबाउड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, नीदरलैंड’ के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ ‘फ्रैंक वैन डे वीरडोंक’ और उनकी टीम ने एक अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसमें उन्होंने फेफड़ों में रक्त वाहिकाओं में रिसाव के लिये एक अनियंत्रित ब्रैडीकिनिन प्रणाली को मुख्य कारण बताया और यह भी अनुमान लगाया कि यह फेफड़ों में अतिरिक्त द्रव निर्माण के लिये उत्तरदायी हो सकता है।गौरतलब है कि इससे पहले वैज्ञानिकों ने COVID-19 संक्रमण के कुछ मामलों में मरीज़ों के स्वास्थ्य में गिरावट के लिये साइटोकिन स्टॉर्म (Cytokine Storm) की भूमिका के बारे में पुष्टि की थी।

क्या है ब्रैडीकिनिन?

ब्रैडीकिनिन एक यौगिक है जो दर्द संवेदना और मानव शरीर में रक्तचाप को कम करने से संबंधित है।शोधकर्ताओं के अनुसार, ’SARS-CoV-2 मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिये ACE2 नामक एक मानव एंज़ाइम का प्रयोग करता है।ACE2 मानव शरीर में रक्तचाप को कम करता है और ACE नामक एक अन्य एज़ाइम के खिलाफ काम करता है।शोधकर्ताओं ने पाया कि COVID-19 वायरस मानव फेफड़ों में  ACE एंजाइम के स्तर को बहुत ही कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप  ACE2 के स्तर में वृद्धि होती है।यह प्रक्रिया एक श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) के रूप में कोशिकाओं में ब्रैडीकाइनिन अणु के स्तर को बढ़ा देती है, जो ब्रैडीकाइनिन स्टॉर्म का कारण बनता है।

ब्रैडीकिनिन रक्त वाहिकाओं के आकार में वृद्धि हो जाती है और उनमें रक्त का रिसाव होने लगता है, जिससे इसके आसपास के ऊतकों में सूजन हो जाती है।शोधकर्त्ताओं ने पाया कि ऐसे मरीज़ों में हायल्यूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid) नामक एक पदार्थ का स्तर बढ़ गया।यह एसिड हाइड्रोजेल बनाने के लिये अपने वजन से 1000 गुना जल अवशोषित कर सकता है।ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म के कारण मरीज़ के फेफड़ों में द्रव के रिसाव और हायल्यूरोनिक एसिड के मिलने से एक जेलो (Jello) जैसे पदार्थ का निर्माण होता है, जो गंभीर रूप से प्रभावित COVID-19 मरीज़ों में ऑक्सीजन के अपवर्तन को रोक देता है।मरीज़ों के फेफड़ों में इस द्रव का तीव्र संचय कभी-कभी वेंटिलेटर जैसी उन्नत गहन देखभाल प्रणालियों को भी प्रभावहीन बना देता है।ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंस’ के निदेशक के अनुसार, ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म की अवधारण कुछ COVID-19 मरीज़ों के स्वास्थ्य में तीव्र गिरावट के संदर्भ में काफी हद तक सही प्रतीत होती है हालाँकि इसमें अभी और अधिक पुष्टि (प्रोटीन मापने के संदर्भ में) की आवश्यकता होगी। 

COVID-19 महामारी और मानव शरीर पर इसके प्रभावों के बारे में अभी बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में बिना किसी प्रमाणिक वैक्सीन के इस बीमारी का इलाज अलग-अलग मरीज़ों के लक्षणों के आधार पर ही किया जा सकता है। COVID-19 संक्रमण के मामलों में ‘ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म’ के बारे में प्राप्त जानकारी के आधार पर मरीज़ों को लक्षित उपचार उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त हो सकती है हालाँकि इस संदर्भ में और अधिक अनुसंधान की आवश्यकता होगी।    

वैज्ञानिकों ने COVID-19 के गंभीर प्रभावों को नियंत्रित करने के लिये ब्रैडीकिनिन मार्ग को लक्षित करते हुए  चिकित्सीय हस्तक्षेप को बढ़ावा देने का समर्थन किया है। मरीज़ों में ब्रैडीकिनिन के लक्षणों के आधार पर वर्तमान में उपलब्ध दवाओं के प्रयोग पर परीक्षण और शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।

 

 


ytokine Storm

कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में शोध चल रहे कई कोरोनो वायरस के रोगी पहले खुद को बेहतर महसूस करते हैं लेकिन बाद में उनका इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर होने लगता है और वो कमजोर होते चले जाते हैं। इसके बाद उनका शरीर वायरस के मुताबिक ही रिएक्‍ट भी करता है। इसको साइटोकिन स्‍टार्म (Cytokine Storm) कहा जाता है। कोरोना पर शोध करने वाले वैज्ञानिक अब इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं ऐसा क्‍यों और कैसे होता है। बीते कुछ महीनों के दौरान इसमें लगातार तेजी देखने को मिली है।

कुछ लोगों में ये भी देखने को मिला है कि जहां इस प्रभाव को कम करने में सफलता हासिल हुई वहां पर मरीज के बचने के चांस भी बढ़ जाते हैं। कहने का अर्थ है कि साइटोकिन स्‍टार्म का रोका जाना कोरोना मरीज के लिए बेहद प्रभावशाली है। कोरोना वायरस को खत्‍म करने के लिए करीब एक दर्जन दवाओं का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। कुछ ऐसी दवाएंं जिनका काम खून की सफाई करना है, जो डाइलीसिस के दौरान मशीनों से होता है, का भी टेस्‍ट किया गया है। कुछ दवाओं का क्‍लीनिकल ट्रायल भी चल रहा है। इनमें एंटीवायरल रेमडेसिविर भी शामिल है।
आपको बता दें कि एक तय मात्रा खून में मौजूद साइटोकिन (Cytokine) हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम के लिए काफी कारगर होते हैं। लेकिन यदि खून में इनकी मात्रा अधिक हो जाए तो ये घातक साबित हो सकते हैं। इनकी तय मौजूदगी हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को बेहतर काम करने में सहायक होती है। इनके बढ़ने से शरीर में इंफेक्‍शन हो सकता है और दूसरी बीमारियां शरीर को घेर सकती हैं। इम्‍यूनोथेरेपी के बाद भी इनकी संख्‍या बढ़ सकती है। इसके लक्षणों की बात करें तो इसमें तेज बुखार शरीर पर सूजन आना, जुकाम होना होता है। कई बार इसकी वजह से शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं जिससे जान तक जाने का खतरा पैदा हो जाता है।

हाल ही में एक जरनल सांइस इम्‍यून में एक दवा के कुछ शुरुआत आंकड़ों के आधार पर कहा गया है कि जब इम्‍यून सेल्‍स और पेथोजन के आपस में मिलने से मोलिक्‍यूल का निर्माण होता है जिसको साइटोकिंस कहते हैं। ये लड़ाई के लिए और cells का निर्माण करते हैं। न्‍यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लेंगोन हैल्‍थ के रूमाटोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर जोस सेकर (rheumatologist) का कहना है कि का खतरा कम होने पर हमारे शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम खुद ही प्रतिक्रियाओं को रोक देता है।

लेकिन कभी कभी ऐसा नहीं होता है और ये लगातार प्रतिक्रिया करता रहता है। इस लगातार होने वाली प्रतिक्रिया की वजह से लंग्‍स काम करना बंद कर देते हैं। इसके अलावा किडनी, लीवर को भी नुकसान पहुंचता है। इस तरह की चीजें युवाओं में और बच्‍चों में देखने को मिलती है। जहां पर वायरस की अवस्‍था माइल्‍ड है वहां पर ये समान स्थिति में ये ऑटोइम्‍यून डिजीज जैसे ल्‍यूपस, रूमाटॉएड अर्थराइटस की तरफ आगे बढ़ जाता है। कोरोना वायरस के मरीजों को ठीक करने के लिए डॉक्‍टर जिन दवाओं का इस्‍तेमाल कर रहे हैं उनमें एस्‍ट्रायड और हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन शामिल है। 

सेकर के मुताबिक कुछ दवाओं को उचित उपयोग और इनके नुकसान की जानकारी होने के बाद इन्‍हें वायरस के खात्‍मे के लिए इस्‍तेमाल किया जा रहा है। इस महामारी की शुरुआत में चीन और इटली के डाक्‍टरों ने मरीज पर साइटोकिन (शॉक, फीवर, दिल के अधिक पंप होने और ब्‍लड प्रेशर के बढ़ने की समस्‍या को देखा और इसका इलाज किया था। इसके लिए tocilizumab दवा का इस्‍तेमाल किया गया। इस दवा को Roche द्वारा बाजार में Actemra के नाम से बेचा जाता है। ये Cytokine को रोक देती है जिसको इंटरल्‍यूकिन-6 या IL-6 कहा जाता है।

कुछ शोध के दौरान ये बात सामने आई है किआईएल-6 का हाईलेवल रेसिपिरेटरी फेल्‍योर या मौत की वजह बनता है। वहीं Actemra इस खतरे को कम करती है। साइंस इम्‍यून में छपे रिसर्च पेपर के मुताबिक केंसर के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली दवा Calquence Cytokine के स्रोतों को रोक या काट देती है।
क्या होता है साइटोकाइन स्टॉर्म, जो प्रतिरक्षा तंत्र को ही बना देता है शरीर का दुश्मन

देश में कोरोना संक्रमण से लोगों में साइटोकाइन स्टॉर्म का खतरा भी बढ़ रहा है। कैसे हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को ही शरीर का दुश्मन बना देता है साइटोकाइन स्टॉर्म? 

‘जब भी हमारे शरीर में कोई वायरस प्रवेश करता है तो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता उससे लड़ती है और उसे खत्म कर देती है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमारा इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है और बीमारी से लड़ने के साथ-साथ हमारे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाने लगता है।’ इसे ही ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ कहा जाता है। 
‘दरअसल, वायरस जब शरीर में प्रवेश करके तेजी से अपनी कॉपी बनाने लगता है, तो इम्यून सिस्टम भी वायरस को खत्म करने के लिए अधिक संख्या में साइटोकाइन पैदा करने लगता है। इस दौरान मरीज को तेज बुखार और सिरदर्द होता है।’ इस बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि जब इम्यून सिस्टम अनियंत्रित और साइटोकाइन का अधिक उत्पादन करने लगता है, तब साइटोकाइन स्टॉर्म का खतरा बढ़ जाता है। 
साइटोकाइन स्टॉर्म के दौरान मरीज कोमा में जा सकते हैं। व शरीर में साइटोकाइन के बढ़ने से ब्लड क्लॉट पैदा हो सकती है, दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती हैं और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ सकती है। 

महामारियों वाले फ्लू में शायद वायरस की वजह से नहीं बल्कि मरीज के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक सक्रिय हो जाने की वजह से मौत होती है। 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू, 2003 में सार्स महामारी और एच1एन1 स्वाइन फ्लू में भी ऐसा देखने को मिला है।


(इंटरल्यूकिन)IL

प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं द्वारा गुप्त विभिन्न प्रोटीन अणुओं में से कोई भी

साइटोकिन्स छोटे प्रोटीन (~ 5-20 केडीए) की एक विस्तृत और ढीली श्रेणी है जो सेल सिग्नलिंग में महत्वपूर्ण हैं। उनकी रिहाई के आसपास के कोशिकाओं के व्यवहार पर असर पड़ता है। यह कहा जा सकता है कि साइटोकिन्स ऑटोक्राइन सिग्नलिंग, पैराक्रिन सिग्नलिंग और इमोक्रोमाइनिंग एजेंटों के रूप में एंडोक्राइन सिग्नलिंग में शामिल हैं। हार्मोन से उनका निश्चित भेद अभी भी चल रहे शोध का हिस्सा है। साइटोकिन्स में केमोकाइन, इंटरफेरॉन, इंटरलेकिन्स, लिम्फोकाइन, और ट्यूमर नेक्रोसिस कारक शामिल हो सकते हैं लेकिन आम तौर पर हार्मोन या वृद्धि कारक नहीं होते हैं साइटोकिन्स कोशिकाओं की एक विस्तृत श्रृंखला द्वारा उत्पादित होते हैं, जिनमें मैक्रोफेज, बी लिम्फोसाइट्स, टी लिम्फोसाइट्स और मास्ट कोशिकाएं, साथ ही एन्डोथेलियल कोशिकाएं, फाइब्रोब्लास्ट्स और विभिन्न स्ट्रॉमल कोशिकाओं जैसे प्रतिरक्षा कोशिकाएं शामिल हैं; एक दिया गया साइटोकिन एक से अधिक प्रकार के सेल द्वारा उत्पादित किया जा सकता है।
वे रिसेप्टर्स के माध्यम से कार्य करते हैं, और प्रतिरक्षा प्रणाली में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं; साइटोकिन्स विनम्र और सेल-आधारित प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के बीच संतुलन को संशोधित करते हैं, और वे विशेष सेल आबादी की परिपक्वता, विकास और प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। कुछ साइटोकिन्स जटिल तरीकों से अन्य साइटोकिन्स की क्रिया को बढ़ाते या रोकते हैं।
वे हार्मोन से अलग होते हैं, जो महत्वपूर्ण सेल सिग्नलिंग अणु भी होते हैं, उस हार्मोन में उच्च सांद्रता में फैलता है और विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं द्वारा किया जाता है।
वे स्वास्थ्य और बीमारी में विशेष रूप से संक्रमण, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, सूजन, आघात, सेप्सिस, कैंसर, और प्रजनन के मेजबान प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण हैं।

प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच सिग्नल ट्रांसडक्शन के लिए जिम्मेदार प्रोटीन के लिए एक सामान्य शब्द। इंटरफेरॉन और ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ) के अलावा, लिम्फोसाइट ने लिम्फोकाइन्स पैदा किए हैं, और मैक्रोफेज मोनोकिन्स का उत्पादन करते हैं, जिन्हें मिश्रित कहा जाता है। 1 9 7 9 से, यह भौतिक रूप से पहचाने गए लोगों से इंटरलेकिन (आईएल के रूप में संक्षेप में) को एकीकृत और क्रमबद्ध करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित किया गया है। वर्तमान में IL1 से IL18 ज्ञात हैं। साइटोकिन्स में प्रभावों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है, जिसमें प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच सूचना संचरण, प्रतिरक्षा कोशिकाओं के प्रसार और भेदभाव, तंत्रिका कोशिकाओं पर क्रिया, एंडोक्राइन कोशिकाएं, हेमेटोपोएटिक कोशिकाएं और इसी तरह की जानकारी शामिल है।
[5/18, 18:03] DR.SSARC: 

             

इंटरल्यूकेन – Vl ( 6)

IL-6 एक प्रोटीन साइटोकिन है जो एक मेसेंजर के रूप में कार्य करता है जो बाहरी आक्रमण पर इम्यून प्रणाली को सक्रिय करता है और शरीर में कैंसर फैलने को रोकने में मदद कर


Bradykinin

ब्रैडीकिनिन एक पेप्टाइड है जो सूजन को बढ़ावा देता है। यह प्रोस्टाइक्लिन, नाइट्रिक ऑक्साइड और एंडोथेलियम-व्युत्पन्न हाइपरप्लाराइजिंग कारक की रिहाई के माध्यम से धमनी को पतला करता है और प्रोस्टाग्लैंडीन F2 के माध्यम से नसों को संकुचित करता है, जिससे केशिकाओं में बढ़ते दबाव के कारण केशिका बेड में रिसाव होता
ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म

COVID-19

COVID-19 संक्रमण के कुछ मामलों में मरीज़ों के स्वास्थ्य में तीव्र गिरावट के लिये ‘ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म’ (Bradykinin Storm) उत्तरदायी है।

‘ओक रिज़ नेशनल लेबोरेटरी’ के कुछ वैज्ञानिकों ने एक सुपर कंप्यूटर के माध्यम से COVID-19 मरीज़ों के फेफड़ों से लिये गए नमूनों के अध्ययन के आधार पर मरीज़ों के स्वास्थ्य पर ‘ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म’ के प्रभावों की जानकारी दी है।द साइंटिस्ट पत्रिका के अनुसार, ‘रेडबाउड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, नीदरलैंड’ के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ ‘फ्रैंक वैन डे वीरडोंक’ और उनकी टीम ने एक अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसमें उन्होंने फेफड़ों में रक्त वाहिकाओं में रिसाव के लिये एक अनियंत्रित ब्रैडीकिनिन प्रणाली को मुख्य कारण बताया और यह भी अनुमान लगाया कि यह फेफड़ों में अतिरिक्त द्रव निर्माण के लिये उत्तरदायी है। COVID-19 संक्रमण के कुछ मामलों में मरीज़ों के स्वास्थ्य में गिरावट के लिये साइटोकिन स्टॉर्म (Cytokine Storm) की भूमिकl थी।

क्या है ब्रैडीकिनिन?

ब्रैडीकिनिन एक यौगिक है जो दर्द संवेदना और मानव शरीर में रक्तचाप को कम करने से संबंधित है।’SARS-CoV-2 मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिये ACE2 नामक एक मानव एंज़ाइम का प्रयोग करता है।ACE2 मानव शरीर में रक्तचाप को कम करता है और ACE नामक एक अन्य एज़ाइम के खिलाफ काम करता है।COVID-19 वायरस मानव फेफड़ों में  ACE एंजाइम के स्तर को बहुत ही कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप  ACE2 के स्तर में वृद्धि होती है।यह प्रक्रिया एक श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) के रूप में कोशिकाओं में ब्रैडीकाइनिन अणु के स्तर को बढ़ा देती है, जो ब्रैडीकाइनिन स्टॉर्म का कारण बनता है।

ब्रैडीकिनिन रक्त वाहिकाओं के आकार में वृद्धि हो जाती है और उनमें रक्त का रिसाव होने लगता है, जिससे इसके आसपास के ऊतकों में सूजन हो जाती . ऐसे मरीज़ों में हायल्यूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid) नामक एक पदार्थ का स्तर बढ़ गया।यह एसिड हाइड्रोजल बनाने के लिये अपने वजन से 1000 गुना जल अवशोषित कर सकता है।ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म के कारण मरीज़ के फेफड़ों में द्रव के रिसाव और हायल्यूरोनिक एसिड के मिलने से एक जेलो (Jello) जैसे पदार्थ का निर्माण होता है, जो गंभीर रूप से प्रभावित COVID-19 मरीज़ों में ऑक्सीजन के अपवर्तन को रोक देता है।मरीज़ों के फेफड़ों में इस द्रव का तीव्र संचय कभी-कभी वेंटिलेटर जैसी उन्नत गहन देखभाल प्रणालियों को भी प्रभावहीन बना देता है।ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंस’ के निदेशक के अनुसार, ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म की अवधारण कुछ COVID-19 मरीज़ों के स्वास्थ्य में तीव्र गिरावट के संदर्भ में काफी हद तक सही प्रतीत होती है (प्रोटीन मापने के संदर्भ में)

COVID-19 महामारी और मानव शरीर पर इसके प्रभावों के बारे में अभी बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में बिना किसी प्रमाणिक वैक्सीन के इस बीमारी का इलाज अलग-अलग मरीज़ों के लक्षणों के आधार पर ही किया जा सकता है। COVID-19 संक्रमण के मामलों में ‘ब्रैडीकिनिन स्टॉर्म’ के बारे में प्राप्त जानकारी के आधार पर मरीज़ों को लक्षित उपचार उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त हो सकती है हालाँकि अधिक अनुसंधान की आवश्यकता होगी।    

COVID-19 के गंभीर प्रभावों को नियंत्रित करने के लिये patients में ब्रैडीकिनिन के लक्षणों के आधार पर वर्तमान में उपलब्ध दवाओं के प्रयोग पर परीक्षण और शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।

तो दोस्तो आपने इन दो गंभीर जानलेवा बिमारियो के बारे मे जाना .कोरोना मे आपने सुना ही होगा कि अमुक जवान व्यक्ति को कोई तकलीफ नही थी एसिम्पटोमैटिक था अचानक गिर पडा और मृत्यू हो गयी बाद मे टैस्ट काविड पाजीटीव निकला तो यह साईटोकाईन स्टाम हीथा जो जानलेवा बन गया.उपलब्ध दवाओ से जीवन बचाना संभव नही बहुत दवाये बरतकर देखी गयी एलोपैथी मे अब अतआधुनिक साईन्स होम्योपैथी मे 1880-90 के नजदीक आयी दो दवाओ के बारे मे जानते है .एक थायमूलिनम (जो थायमस ग्लैण्ड के हिस्से को काटकर ही बनायी गयी ) दूसरी है बोथरोपस सनेक विनाम (पिट सनेक पीले रंग के नाग की किस्म के जहर से बनी जो अठारवी सदी के अंत मे आयी .पहली सनेक विनाम अमेरिकन होम्योपैथ डा.सी.हेयरिन्ग ने लैकेसिस नाम से बुशमास्टर नाग के जहर से बनी थी इसके बाद बारह अलग-2 सनेक विनाम दवाये होम्योपैथी मे आ गयी थी.सन 1953 मे एलोपैथी मे भी पिट सनेक की दूसरी किस्म से बोथरोपस जकारा नाम से दवा बनायी गयी जो क्लाट बनने से रोकने,खून पतला करने व अंतसावी रक्तसाव रोकने मे बरती जा रही है .बहुत सी कंपनियो ने नये अनुसंधानो मे इनकी उपयोगिता मानी है.होम्यौपैथी के अनुसंधानियो ,साईन्टिस्टो ने भी इन पूरानी दवाओ को नये तकनीको से परख परिष्कृत करके लाईलाज रोगो व आपातकालीन केसो मे जीवन बचाने मे उपयोगी पाया.यह मेरी कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नही न ही मै कोई बात अपनी तरफ से इन दवाओ के बारे मे लिखकर वाहवाही लूटने की मेरी मंशा है.जिस काविड का ईलाज ही नही उसमे लाखो रू लगाकर भी रोगियो के परिजन हताश,व्यथित दुखी व खफा है .अगर हमारी फिल्ड मे कोई अच्छा ईलाज है तो सबके साथ साझा करके कोई गुनाह नही कर रहे .आज भी हमारे डा.रोगी के ईलाज मे दी दवा का नाम नही बताते ,दकियानूसी विचारो मे डूबे, आत्मविश्वास की कमी से पीढित या खीचतान,उठाफठक मे समय गंवाने वाले चिकित्सको की सोच की वजह से नौसिखिये लोगो ने पेशे को निचले स्तर तक ला दिया और हम सब सोये रहे. जरूरत इस पेशे को पब्लिश करवाकर जनता,मीडिया व सरकारो के सामने लाने की है.हमारे देश की एकानामी पश्चिम या यूरोप की तरह दवा बाजार पर डिपैन्ड नही लाखो जीवन कम खचे’ के ईलाज से भी बचाये जा सकते है

https://en.wikipedia.org/wiki/Van

https://ejrnm.springeropen.com/articles/10.1186/s43055-021-00422-3

https://www.facebook.com/groups/734842719915714/permalink/3949009631832324/

http://homeoint.org/books/soukrexp/thymleng.htm

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/28844286/

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/29157470/
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/33633511/

https://en.wikipedia.org/wiki/Bradykinin

https://academic.oup.com/ajh/article/34/4/304/6240056

https://www.rockefeller.edu/news/29861-blood-may-hold-clues-covid-19s-mysterious-symptoms

https://www.materiamedica.info/en/materia-medica/john-henry-clarke/bothrops-lanceolatus

https://nesh.com/the-new-england-journal-of-homeopathy/vol-8-no-2-fallwinter-1999/bothrops-lanceolatus-paul-herscu/

https://newdrugapprovals.org/2013/04/19/homeopathy-bothrops-for-thrombosis/

https://newdrugapprovals.org/2013/04/19/homeopathy-bothrops-for-thrombosis/

BOTHROPS LANCEOLATUS

by William Boericke

Homeopathy medicine Bothrops Lanceolatus from William Boericke’s Pocket manual of homoeopathic materia medica, comprising the characteristic and guiding symptoms of all remedies, published in 1906…

Yellow Viper
(BOTHROPS LANCIOLATUS – LACHESIS LANCIOLATUS)

Its venom is most coagulating, (also Lachesis). We should expect to find under these remedies the symptomatology of thrombosis, also thrombotic phenomena, as hemiplegia, aphasia, inability to articulate (Linn J. Boyd).

Broken-down, hæmorrhagic constitutions; septic states. Great lassitude and sluggishness; hæmorrhages from every orifice of the body; black spots. Hemiplegia with aphasia. Inability to articulate, without any affection of the tongue. Nervous trembling. Pain in right big toe. Diagonal course of symptoms. Pulmonary congestion.

Eyes.–Amaurosis; blindness from hæmorrhage into retina. Hemoralopia, day blindness, can hardly see her way after sunrise; conjunctivial hæmorrhage.

Face.–Swollen and puffy. Besotted expression.

Throat.–Red, dry, constricted; swallowing difficult, cannot pass liquids.

Stomach.–Epigastric distress. Black vomiting. Intense hæmatemesis. Tympanitis and bloody stools.

Skin.–Swollen, livid, cold with hæmorrhagic infiltration. Gangrene. Lymphatics swollen. Anthrax. Malignant erysipelas.

Modalities.–Worse, right side.

Relationship.–Compare: Toxicophis.–Moccasin Snake (pain and fever recur annually, after bite from this snake, and sometimes change location with disappearance of first symptoms. An unusual dryness of skin follows the bite. Œdematous swellings and periodical neuralgia. Pain travels from one part to another). Other snake poisons, notably Lachesis.

Trachinus,-Stingfish (intolerable pains, swelling, acute blood, poisoning, gangrene).

Dose.–Sixth to thirtieth


 Bothrops Lanceolatus homeopathy medicine – drug proving symptoms from Encyclopedia of Pure Materia Medica by TF Allen, published in 1874. It has contributions from R Hughes, C Hering, C Dunham,

William Boericke, M.D., was born in Austria, in 1849. He graduated from Hahnemann Medical College in 1880 and was later co-owner of the renowned homeopathic pharmaceutical firm of Boericke & Tafel, in Philadelphia. Dr. Boericke was one of the incorporators of the Hahnemann College of San Francisco, and served as professor of Materia Medica and Therapeutics. He was a member of the California State Homeopathic Society, and of the American Institute of Homeopathy. He was also the founder of the California Homeopath, which he established in 1882. Dr. Boericke was one of the board of trustees of Hahnemann Hospital College. He authored the well known Pocket Manual of mm.

BOTHROPS LANCEOLATUS

by William Boericke

Homeopathy medicine Bothrops Lanceolatus from William Boericke’s Pocket manual of homoeopathic materia medica, comprising the characteristic and guiding symptoms of all remedies, published in 1906…

Yellow Viper
(BOTHROPS LANCIOLATUS – LACHESIS LANCIOLATUS)

Its venom is most coagulating, (also Lachesis). We should expect to find under these remedies the symptomatology of thrombosis, also thrombotic phenomena, as hemiplegia, aphasia, inability to articulate (Linn J. Boyd).

Broken-down, hæmorrhagic constitutions; septic states. Great lassitude and sluggishness; hæmorrhages from every orifice of the body; black spots. Hemiplegia with aphasia. Inability to articulate, without any affection of the tongue. Nervous trembling. Pain in right big toe. Diagonal course of symptoms. Pulmonary congestion.

Eyes.–Amaurosis; blindness from hæmorrhage into retina. Hemoralopia, day blindness, can hardly see her way after sunrise; conjunctivial hæmorrhage.

Face.–Swollen and puffy. Besotted expression.

Throat.–Red, dry, constricted; swallowing difficult, cannot pass liquids.

Stomach.–Epigastric distress. Black vomiting. Intense hæmatemesis. Tympanitis and bloody stools.

Skin.–Swollen, livid, cold with hæmorrhagic infiltration. Gangrene. Lymphatics swollen. Anthrax. Malignant erysipelas.

Modalities.–Worse, right side.

Relationship.–Compare: Toxicophis.–Moccasin Snake (pain and fever recur annually, after bite from this snake, and sometimes change location with disappearance of first symptoms. An unusual dryness of skin follows the bite. Œdematous swellings and periodical neuralgia. Pain travels from one part to another). Other snake poisons, notably Lachesis.

Trachinus,-Stingfish (intolerable pains, swelling, acute blood,

https://www.covid19treatmentguidelines.nih.gov/anti-sars-cov-2-antibody-products/anti-sars-cov-2-monoclonal-antibodies/

Bothropus Lanceolatus/Lachesis (Pit viper)

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